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सत्र सार 2012/1

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 उत्तराखण्ड विधान सभा के 26 मार्च, 2012 से 29 मार्च, 2012 तक चले अधिवेशन के दौरान निष्पादित हुए कार्य का सारांश
    उत्तराखण्ड की तृतीय विधान सभा हेतु आम चुनाव 30 जनवरी, 2012 को सम्पन्न हुए तथा चुनाव परिणाम 6 मार्च, 2012 को घोषित हुए। 70 सदस्यीय सदन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 32 सदस्यों के साथ सबसे बड़े विधायी दल के रूप मंे उभरी। दूसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी रही जिसे 31 सीटें प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त बहुजन समाज पार्टी, उत्तराखण्ड क्रांति दल तथा निर्दलीय को क्रमशः 3, 1 तथा 3 सीटें प्राप्त हुई। 13 मार्च, 2012 को श्री विजय बहुगुणा ने राज्य के मुख्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। संविधान के अनुच्छेद 333 के अन्तर्गत महामहिम राज्यपाल ने श्री आर0 वी0 गार्डनर को एंग्लो इंडियन समुदाय के रूप मंे नामित किया। 26 मार्च, 2012 को अध्यक्ष का चुनाव हुआ जिसमें श्री गोविन्द सिंह कुंजवाल अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 27 मार्च, 2012 को महामहिम राज्यपाल ने अभिभाषण दिया।     इस प्रकार तृतीय विधान सभा का वर्ष 2012 का प्रथम सत्र 27 मार्च, 2012 को मा0 अध्यक्ष द्वारा महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण के पाठ से प्रारम्भ हुआ तथा 29 मार्च, 2012 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सत्र में सदन द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा व पारण तथा वित्तीय वर्ष 2012-13 के एक भाग के लिए लेखानुदान एवं कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार एवं पारण आदि मुख्य कार्य निष्पादित किये गये। सत्र में कुल मिलाकर 3 उपवेशन हुए तथा सत्र के दौरान मा0 सदस्यों की औसत उपस्थिति 95.00ः रही।
सत्र काल मंे सदन द्वारा उत्तर प्रदेश विधान मण्डल के पूर्व सदस्यों स्व0 श्री देवेन्द्र शास्त्री तथा स्व0 श्री विद्यासागर नौटियाल को श्रृद्धांजली अर्पित की गयी। मा0 अध्यक्ष, मा0 संसदीय कार्य मंत्री, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी एवं उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के संसदीय दलों के नेताओं तथा अन्य सदस्यों ने दिवंगत आत्माओं के प्रति शोक संवेदनाएं प्रकट की।
दिनांक 29 मार्च, 2012 को मुख्य मंत्री श्री विजय बहुगुणा ने मंत्रीमण्डल में विश्वासमत का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रस्ताव के विरोध में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने वाक आउट किया। 71 सदस्यों में से पीठासीन अधिकारी को छोड़कर सदन में उपस्थित 39 मा0 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में ध्वनिमत दिया और इस प्रकार प्रस्ताव पारित हुआ। संसदीय कार्य मंत्री ने 28 मार्च, 2012 को वित्तीय वर्ष 2012-2013 के एक भाग के लिए लेखानुदान प्रस्तुत किया। इस पर विचार एवं पारण 29 मार्च, 2012 को हुआ। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का प्रस्तुतीकरण 28 मार्च को हुआ तथा इस पर विचार 28 एवं 29 मार्च, 2012 को हुआ जिसमें 14 मा0 सदस्यों ने भाग लिया। 29 मार्च, 2012 को धन्यवाद प्रसताव पारित हुआ।
सत्र में प्रश्न काल में कुल मिलाकर 46 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुईं जिसमें तारांकित एवं अतारांकित प्रश्न भी सम्मलित थे। इनमे से 09 को तारांकित, 32 को अतारांकित तथा 01 को अल्पसूचित प्रश्न के रूप में स्वीकार किया गया। नियमों की आवश्यकताओं की पूर्ति न होने के कारण इनमें से कोई भी प्रश्न सदन में उत्तरित होने हेतु सूचीबद्ध नहीं हुआ।
उत्तराखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 300 के अर्न्तगत ध्यानाकर्षण की 3 सूचनाएं प्राप्त हुई, जो अस्वीकृत हुई, कार्य स्थगन की 5 सूचनाएं प्राप्त हुई सभी अस्वीकृत हुई तथा 11 को ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार किया गया। नियम 53 के अर्न्तगत 3 सूचनाएं प्राप्त हुई जिसमंे से 1 वक्तव्य के लिए स्वीकृत हुई, परन्तु सदस्य का नाम पुकारे जाने पर अनुपस्थित रहने के कारण सदन में नहीं ली गई।
28 मार्च, 2012 को प्रमुख सचिव, विधान सभा ने घोषणा की कि निम्नलिखित विधेयक, जिन्हें विधान सभा द्वारा पारित किया गया था पर महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हो गयी तथा वे उत्तराखण्ड के वर्ष 2012 के अधिनियम बन गए:-
क्र0सं0    नाम    दिनांक    वर्ष 2011का
अधिनियम सं0


        सदन द्वारा पारण    महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्ति    
1    पं0 दीनदयाल उपाध्याय उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय विधेयक, 2011     01.11.2011    03.11.2011    22

सत्रावधि में निम्न पत्र सदन के पटल पर रखे गये -
1ण्    उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन मण्डी (विकास एवं विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2011
2ण्    उत्तराखण्ड चिकित्सा परिचर्या सेवाकर्मी और सेवा संस्था (हिंसा और सम्पत्ति के क्षति का निवारण) अध्यादेश, 2011
3ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-151 के खण्ड (2) के अधीन भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के वर्ष, 2010-11 के वित्त लेखे एवं विनियोग लेखे।
    सत्र के दौरान सभा द्वारा निम्न विधेयक का पुरःस्थापन, विचार एवं पारण किया गया -    
        महत्वपूर्ण कार्य के निष्पादन के पश्चात् दिनांक 29 मार्च, 2012 के उपवेशन की समाप्ति पर मा0 अध्यक्ष द्वारा सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया। 23 अप्रैल, 2012 को महामहिम राज्यपाल द्वारा सत्रावसान की घोषणा कर दी गई।