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प्रथम सत्र 2011

प्रिंट

उत्तराखण्ड विधान सभा के 14 मार्च, 2011 से 29 मार्च, 2011 तक चले अधिवेशन के दौरान निष्पादित हुए कार्य का सारांश
उत्तराखण्ड की द्वितीय विधान सभा का वर्ष 2011 का प्रथम सत्र 14 मार्च, 2011 को महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण से प्रारम्भ हुआ तथा 29 मार्च, 2011 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सत्र में सदन द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा व पारण तथा वित्तीय वर्ष 2011-12 के आय-व्ययक एवं कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार एवं पारण आदि मुख्य कार्य निष्पादित किये गये। सत्र में कुल मिलाकर 09 उपवेशन हुए तथा सत्र के दौरान मा0 सदस्यों की औसत उपस्थिति 91.4ः रही।
सत्र काल मंे सदन द्वारा स्व0 श्री फूल सिंह बिष्ट, पूर्व सदस्य, उत्तराखण्ड  विधान सभा, स्व0 आचार्य जगदीश मुनि पूर्व सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान सभा तथा स्व0 श्री सुल्तान सिंह भण्डारी, पूर्व सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान परिषद को श्रृद्धांजली अर्पित की गयी। मा0 अध्यक्ष, मा0 संसदीय कार्य मंत्री, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी एवं उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के संसदीय दलों के नेताओं तथा अन्य सदस्यों ने दिवंगत आत्माओं के प्रति शोक संवेदनाएं प्रकट की।
दिनांक 23 मार्च, 2011 को सदन द्वारा 11 मार्च, 2011 को जापान में आये भीषण भूकम्प व सूनामी से हुई भारी तबाही पर शोकोद्गार व्यक्त किए गये तथा इस त्रासदी में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया। माननीय मुख्यमंत्री ने 22 मार्च, 2011 को वित्तीय वर्ष 2011-2012 का आय-व्ययक प्रस्तुत किया जिस पर दिनांक 23 व 24 मार्च, 2011 को सामान्य चर्चा हुई। चर्चा में 23 माननीय सदस्योें ने भाग लिया। मा0 मुख्यमंत्री ने 24 मार्च, 2011 को चर्चा पर उत्तर दिया। सदन द्वारा विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर 25, 28 तथा 29 मार्च, 2011 को विचार एवं पारण किया गया। 29 मार्च, 2011 को विनियोग विधेयक पुरःस्थापित हुआ और उस पर विचार एवं पारण हुआ।
सत्र में प्रश्न काल में कुल मिलाकर 33 सदस्यों ने प्रश्नों की सूचनाएं पटल पर रखीं। कुल 751 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुईं जिसमें तारांकित एवं अतारांकित प्रश्न भी सम्मलित थे। इनमे से 157 को तारांकित, 466 को अतारांकित तथा 09 को अल्पसूचित प्रश्न के रूप में स्वीकार किया गया।
सत्र के दौरान कुल 402 प्रश्न पूछे गये तथा उत्तर दिये गये जिनमें से 84 तारांकित, 311 अतारांकित तथा 07 अल्पसूचित प्रश्न थे। सत्र के दौरान नियम 40 (2) के अन्तर्गत स्थगित 07 तारांकित प्रश्न तथा 02 अतारंकित प्रश्नों के उत्तर भी दिए गये।
उत्तराखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 300 के अर्न्तगत ध्यानाकर्षण की 71 सूचनाएं प्राप्त हुई, जिसमें से 50 स्वीकृत हुई, कार्य स्थगन की 87 सूचनाएं प्राप्त हुई जिसमें से 31 को ग्राह्यता पर सुना गया। सुनने के पश्चात सभी अस्वीकृत हुई तथा 11 को ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार किया गया। नियम 53 के अर्न्तगत 70 सूचनाएं प्राप्त हुई जिसमंे से 07 वक्तव्य के लिए स्वीकृत हुई, 07 केवल वक्तव्य के लिए स्वीकृत हुई तथा 09 ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार हुईं। नियम 310 के अन्तर्गत नियमों को निलम्बित कर चर्चा कराए जाने सम्बन्धी 40 सूचनाएं प्राप्त हुई जिनमे से 13 को नियम 58 के अन्तर्गत ग्राहयता पर सुना गया। सुनने के पश्चात सभी अस्वीकार हुई।
15 मार्च, 2011 को प्रमुख सचिव, विधान सभा ने घोषणा की कि निम्नलिखित विधेयक, जिन्हें विधान सभा द्वारा पारित किया गया था पर महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हो गयी तथा वे उत्तराखण्ड के वर्ष 2011 के अधिनियम बन गए:-
क्र0सं0    नाम    दिनांक    वर्ष 2011 का
अधिनियम सं0


        सदन द्वारा पारण    महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्ति    
1    उत्तराखण्ड विनियोग (2010-2011 का प्रथम अनुपूरक) विधेयक, 2010    23.09.2010    28.09.2010    24
2    उत्तराखण्ड मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010    23.09.2010    04.10.2010    25

सत्रावधि में निम्न पत्र सदन के पटल पर रखे गये -
1ण्    उत्तराखण्ड आकस्मिकता निधि (संशोधन) अध्यादेश, 2010
2ण्    उत्तराखण्ड राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2010
3ण्    उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन मण्डी (संशोधन) अध्यादेश, 2010
4ण्    उत्तराखण्ड जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था (संशोधन) अध्यादेश, 2011
5ण्    उत्तराखण्ड विधान सभा के वर्ष 2010 के द्वितीय सत्र में उत्तराखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 2005 के नियम 300 के अन्तर्गत प्राप्त सूचनाओं पर कृत कार्यवाही का विवरण।
6ण्    कम्पनी एक्ट, 1956 की धारा-619-ए (2) के अन्तर्गत उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लिमिटेड की वित्तीय वर्ष, 2001-2002, 2002-2003, 2003-2004, 2004-2005 एवं 2005-2006 की वार्षिक रिर्पाेट।
7ण्    कम्पनी एक्ट, 1956 की धारा-619-ए (2) के अन्तर्गत पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखण्ड लिमिटेड की वित्तीय वर्ष, 2004-2005, 2005-2006, एवं 2006-2007 की वार्षिक रिर्पाेट।
8ण्    उत्तराखण्ड विधान सभा की याचिका समिति (2010-11) का द्वितीय प्रतिवेदन।
9ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-151 के खण्ड (2) के अधीन भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के वर्ष, 2009-10 के वित्त लेखे एवं विनियोग लेखे।
10ण्    स्थानीय निधि लेखा परीक्षा अधिनियम, 1984 की धारा 8(3) के अन्तर्गत वर्ष, 2009-10 का स्थानीय निधि लेखा परीक्षा प्रभाग का वार्षिक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन तथा वर्ष 2009-10 का सहकारी समितियां एवं पंचायतें लेखा परीक्षा प्रभाग का वार्षिक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन।
11ण्    केन्द्रीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 104 (4) के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग के वर्ष, 2009-2010 के वार्षिक लेखे।
12ण्    उत्तराखण्ड विधान सभा की आश्वासन समिति (2009-10) का सोलहवां प्रतिवेदन।
13ण्    उत्तराखण्ड विधान सभा की आश्वासन समिति (2009-10) का सत्रहवां प्रतिवेदन।
14ण्    उत्तराखण्ड विधान सभा की आश्वासन समिति (2009-10) का अठ्ठारहवां प्रतिवेदन।
15ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-323 (2) के अधीन उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग को नवम् वार्षिक प्रतिवेदन (01 अपै्रल, 2009 से 31 मार्च, 2010 तक)।
16ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-243-झ (4) के अन्तर्गत द्वितीय राज्य वित्त आयोग (पंचायती राज एवं नगरीय स्थानीय निकाय) की संस्तुतियों पर राज्य सरकार द्वारा की गयी कार्यवाही का स्पष्टीकरण ज्ञापन।
17ण्    उत्तर प्रदेश वन निगम अधिनियम, 1974 (उत्तराखण्ड में यथा प्रवृत्त) की धारा 23 (4) के अन्तर्गत उत्तराखण्ड वन विकास निगम के वित्तीय वर्ष 2001-2002 से वित्तीय वर्ष 2006-2007 तक के वार्षिक लेखों का विवरण तथा वार्षिक आर्थिक चिट्ठे।
18ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-151 के खण्ड (2) के अधीन भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के 31 मार्च, 2010 को समाप्त वर्ष के ‘राज्य सरकार के वित्त‘ पर प्रतिवेदन (प्रतिवेदन संख्या-1) तथा उक्त अवधि का उत्तराखण्ड सरकार से संबंधित लेखा परिक्षा प्रतिवेदन (प्रतिवेदन संख्या-2)
     सत्र के दौरान सभा द्वारा निम्नलिखित विधेयकों का पुरःस्थापन, विचार एवं पारण किया गया -    
1.    भारतीय रजिस्ट्रीकरण (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2011
2.    भारतीय स्टाम्प (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2011
3.    हिमगिरी नभ विश्वविद्यालय (यूनिवर्सिटी इन द स्काई) (संशोधन) विधेयक, 2011
4.    उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2011
5.    उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन विपणन (विकास एवं विनियमन) विधेयक, 2011
6.    उत्तराखण्ड राज्य विधान सभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) (संशोधन) विधेयक, 2011
7.    उत्तराखण्ड जल संभरण सीवर व्यवस्था (संशोधन) विधेयक, 2011
8.    उत्तराखण्ड कृषि उत्पादन मण्डी (संशोधन) विधेयक, 2011
9.    उत्तराखण्ड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबन्धन (संशोधन) विधेयक, 2011
10.    उत्तराखण्ड माल के स्थानीय क्षेत्रों में प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2011
11.    उत्तराखण्ड कराधान तथा भू-राजस्व विधि (संशोधन) विधेयक, 2011
12.    उत्तराखण्ड राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2011
13.    उत्तराखण्ड आकस्मिकता निधि अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2011
14.    उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार (संशोधन) विधेयक, 2011
15.    उत्तराखण्ड वन विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2011
16.    उत्तराखण्ड कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2011
17.    उत्तराखण्ड विनियोग विधेयक, 2011
18.    उत्तराखण्ड ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय विधेयक, 2011
19.    उत्तराखण्ड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था (संशोधन) विधेयक, 2011
सत्रावधि में सदन द्वारा निम्नलिखित संकल्प पारित हुए
1.    ’’यह विधान सभा संविधान के अनुच्छेद 252 के खण्ड (2) के साथ पठित खण्ड (1) के अनुसरण में एतद्द्वारा यह संकल्प करती है कि नैदानिक स्थापन (रजिष्ट्रीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 (केन्द्रीय अधिनियम संख्या 23, वर्ष, 2010) को इस राज्य में अंगीकृत किया जाए।’’
सन्दर्भ: ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद 252 के खण्ड (2) के साथ पठित खण्ड (1) के अनुसार अन्य राज्यों यथा अरूणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम तथा संघ राज्यों के विधान मण्डलों की भांति संसद द्वारा अधिनियमित नैदानिक स्थापन (रजिष्ट्रीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 (केन्द्रीय अधिनियम संख्या 23, वर्ष, 2010) को उत्तराखण्ड राज्य के परिप्रेक्ष्य में अंगीकृत किये जाने हेतु उक्त संकल्प स्वीकृत हुआ।
2.    ’’यह विधान सभा केन्द्र सरकार से यह मांग करती है कि इस क्षेत्र को पर्यावरणीय अतिसंवेदनशील क्षेत्र (ईको सैंसेटिव जोन) घोषित किए जाने की कार्यवाही को तत्काल रोक दिया जाए’’
सन्दर्भ: भारत का सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा उत्तरकाशी जिले के कतिपय क्षेत्र को पर्यावरणीय अतिसंवेदनशील क्षेत्र (ईको सैंसेटिव जोन) घोषित किए जाने की योजना के सन्दर्भ में ईको सैंसेटिव जोन का चिन्हांकन गलत तथ्यों के आधार पर होने के कारण प्रतिकूल प्रभाव की सम्भावना तथा इस क्षेत्र को पर्यावरणीय अतिसंवेदनशील क्षेत्र घोषित किए जाने के पश्चात क्षेत्र में समस्त विकास कार्य अवरूद्ध हो जाने की सम्भावना से क्षेत्र की जागरूक जनता में व्याप्त रोष तथा उसके आन्दोलनरत होने की स्थिति के दृष्टिगत उक्त संकल्प स्वीकृत हुआ।
3.    ’’यह विधान सभा केन्द्र सरकार से यह मांग करती है कि एस0एस0बी0 गुरिल्लों (स्वयं सेवक) की सेवाओं को दृष्टिगत रखते हुए उनके सेवायोजन, पेंशन तथा सेवा सम्बन्धी अन्य हित लाभ दिए जाए’’
सन्दर्भ: एस0एस0बी0 गुरिल्लों (स्वयं सेवक) की (निरन्तर यह मांग रही है कि) उनकी देश की सुरक्षा एवं विकास के लिए की गई सेवाओं को दृष्टिगत रखते हुए उनके सेवायोजन, पेंशन तथा सेवा सम्बन्धी सम्तस्त हित लाभ देने संबंधी निरन्तर मांग के दृष्टिगत यह संकल्प स्वीकृत हुआ।
4.    ’’यह विधान सभा केन्द्र सरकार से यह मांग करती है कि इस क्षेत्र को तत्काल ‘‘कस्तूरा मृग विहार‘‘ क्षेत्र से मुक्त कर दिया जाए‘‘
सन्दर्भ: पिथौरागढ़ के अस्कोट के कतिपय क्षेत्र को ‘‘कस्तूरा मृग विहार‘‘ क्षेत्र घोषित किए जाने के पश्चात् क्षेत्र के विकास के दृष्टिकोण से सम्पन्न कराये जाने वाले समस्त विकास कार्य अवरूद्ध हो गये हैं। क्षेत्र के विकास कार्य अवरूद्ध होने के कारण क्षेत्र की जागरूक जनता में व्याप्त रोष तथा उसके आन्दोलनरत होने की स्थिति के दृष्टिगत उक्त संकल्प स्वीकृत हुआ।
5.    ’’यह विधान सभा केन्द्र सरकार से यह मांग करती है कि प्रदेश में वर्तमान विकास खण्डों की संख्या को बढ़ाते हुए नये विकास खण्डों का सृजन कर दिया जाए‘‘
सन्दर्भ: प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थिति तथा प्रशासनिक दृष्टिकोण से जन सामान्य को सुविधा प्रदान किये जाने हेतु प्रदेश में वर्तमान विकास खण्डों की संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता को दृष्टिगत उक्त संकल्प स्वीकृत हुआ।
        महत्वपूर्ण कार्य के निष्पादन के पश्चात् दिनांक 29 मार्च, 2011 के उपवेशन की समाप्ति पर मा0 अध्यक्ष द्वारा सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया। 3 जून, 2011 को महामहिम राज्यपाल द्वारा सत्रावसान की घोषणा कर दी गई।