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द्वितीय सत्र 2010

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उत्तराखण्ड विधान सभा के 22 सितम्बर, 2010 से 23 सितम्बर, 2010 तक चले अधिवेशन के दौरान निष्पादित हुए कार्य का सारांश
         उत्तराखण्ड की द्वितीय विधान सभा का वर्ष, 2010 का द्वितीय सत्र 22 सितम्बर, 2010 को प्रारम्भ हुआ तथा 23 सितम्बर, 2010 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सत्र में सदन द्वारा वित्तीय वर्ष 2010-11 के अनुपूरक अनुदान की मांगों का प्रस्तुतीकरण, चर्चा व पारण व कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार एवं पारण आदि मुख्य कार्य निष्पादित किये गये। सत्र में कुल मिलाकर 2 उपवेशन हुए।
सत्र के दौरान मा0 सदस्यों की औसत उपस्थिति 90ः रही। उपवेशनों के दौरान महत्वपूर्ण कार्य के निष्पादन के पश्चात 23 सितम्बर, 2010 को सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया।  
सत्र के दौरान सदन द्वारा स्व0 श्री प्रताप सिंह उर्फ प्रताप भैय्या, व श्री सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया, पूर्व सदस्य उत्तर प्रदेश विधान सभा को श्रृद्धांजली अर्पित की गयी। मा0 अध्यक्ष, मा0 संसदीय कार्य मंत्री, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी एवं उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के संसदीय दलों के नेताओं तथा अन्य सदस्यों ने दिवंगत आत्माओं के प्रति शोक संवेदनाएं प्रकट की।
माननीय मुख्यमंत्री ने 22 सितम्बर, 2010 को वित्तीय वर्ष 2010-11 की अनुपूरक अनुदानों की मांगे प्रस्तुत की जिस पर दिनांक 23 सितम्बर, 2010 को चर्चा हुई तथा 23 सितम्बर, 2010 को ही अनुपूरक विनियोग विधेयक पुरःस्थापित हुआ और उस पर विचार एव पारण हुआ।
सत्र में प्रश्न काल में कुल मिलाकर 26 सदस्यों ने प्रश्नों की सूचनाएं पटल पर रखीं। कुल 824 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुईं जिसमें तारांकित एवं अतारांकित प्रश्न भी सम्मलित थे। इनमें से 163 को तारांकित, 498 को अतारांकित तथा 05 को अल्पसूचित प्रश्न के रूप में स्वीकार किया गया।
सत्र के दौरान कुल 107 प्रश्न पूछे गये तथा उत्तर दिये गये जिनमें से 28 तारांकित, 78 अतारांकित तथा 01 अल्पसूचित प्रश्न थे। सत्र के दौरान नियम 40 (2) के अन्तर्गत स्वीकार 02 स्थगित तारंकित प्रश्न तथा 01 स्थगित अतारांकित प्रश्न के उत्तर भी दिए गये।     
उत्तराखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 300 के अर्न्तगत ध्यानाकर्षण की 07 सूचनाएं प्राप्त हुई, जिसमें से 04 स्वीकृत हुई, कार्य स्थगन की 15 सूचनाएं प्राप्त हुई जिसमें से 04 को ग्राह्यता पर सुना गया। 04 सूचनाओं को ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार किया गया। तथा शेष सूचनाएं सुनने के पश्चात अस्वीकृत र्हुइं नियम 53 के अर्न्तगत 09 सूचनाएं प्राप्त हुई जिसमंे से 01 स्वीकृत हुई। नियम 310 के अन्तर्गत नियमों को निलम्बित कर चर्चा कराए जाने सम्बन्धी 11 सूचनाएं प्राप्त हुई जिनमे से 01 को नियम 58 के अन्तर्गत ग्राहयता पर सुना गया तथा सुनने के पश्चात अस्वीकार हुई।
22 सितम्बर, 2010 को प्रमुख सचिव, विधान सभा ने घोषणा की कि निम्नलिखित विधेयक, जिन्हें विधान सभा द्वारा पारित किया गया था पर महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हो गयी तथा वे उत्तराखण्ड के वर्ष 2010 के अधिनियम बन गए:-
क्र0सं0    नाम    दिनांक    वर्ष 2010 का
अधिनियम सं0


        सदन द्वारा पारण    महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्ति    
1    उत्तराखण्ड माल के स्थानीय क्षेत्रों में प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2010    18.03.2010    25.03.2010    18
2    उत्तराखण्ड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण विधेयक, 2010    18.03.2010    25.03.2010    19
3    उत्तराखण्ड अनानुदानित निजि व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं (प्रवेश तथा शुल्क निर्धारण विनियम) (संशोधन) विधेयक, 2010    18.03.2010    25.03.2010    20
4    उत्तराखण्ड (संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910) (संशोधन) विधेयक, 2010    19.03.2010    25.03.2010    21
5    उत्तराखण्ड सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक, 2010    19.03.2010    25.03.2010    22
6    उत्तराखण्ड विनियोग विधेयक, 2010    26.03.2010    26.03.2010    23

सत्रावधि में निम्न पत्र सदन के पटल पर रखे गये -
1ण्    अध्यक्ष, उत्तराखण्ड विधान सभा द्वारा जारी किये गये प्रक्रिया संबंधी निदेश संख्या-14 (3) की अपेक्षानुसार उत्तराखण्ड विधान सभा के वर्ष, 2010 के प्रथम सत्र में, उत्तराखण्ड विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 2005 के नियम-300 के अन्तर्गत प्राप्त सूचनाओं पर कृत कार्यवाही का विवरण।
2ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-151 के खण्ड (2) के अधीन भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के 31 मार्च, 2009 को समाप्त हो रहे वर्ष के लिए ’राज्य सरकार के वित्त‘ पर प्रतिवेदन।
3ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-151 के खण्ड (2) के अधीन भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के 31 मार्च, 2009 को समाप्त हो रहे वर्ष के लिए ‘निजि क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से जल विद्युत विकास‘ की निष्पादन ‘लेखापरीक्षा‘ प्रतिवेदन।
4ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-151 के खण्ड (2) के अधीन भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्ड सरकार के 31 मार्च, 2009 को समाप्त हो रहे वर्ष के लिए ‘लेखापरीक्षा‘ प्रतिवेदन।
5ण्    ‘‘भारत का संविधान‘‘ के अनुच्छेद-323 के खण्ड (2) के अधीन उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग का अष्टम वार्षिक प्रतिवेदन (01 अप्रैल, 2008 से 31 मार्च, 2009 तक)
6ण्    भारत सरकार के सूक्ष्म, लधु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 की धारा 30 (3) के अन्तर्गत ‘‘ उत्तराखण्ड राज्य सूक्ष्म तथा लद्यु उद्यम सुकरता परिषद नियमावली 2010‘‘।
7ण्    केन्द्रीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 104 (4) के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग के वर्ष 2008-09 के वार्षिक लेखा विवरण।
8ण्    सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य सूचना आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन (वर्ष 2007-08 ए0टी0आर0 सहित)।
9ण्    उत्तराखण्ड द्वितीय विधान सभा की लोक लेखा समिति (2009-2010) का आठवां, नवां एवं दसवां प्रतिवेदन।
    सत्र के दौरान सभा द्वारा निम्नलिखित विधेयकों का पुरःस्थापन, विचार एवं पारण किया गया -
1.    उत्तराखण्ड मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2010
2.    पं0 दीनदयाल उपाध्याय उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय विधेयक, 2010
3.    उत्तराखण्ड विनियोग (2010-2011 का प्रथम अनुपूरक) विधेयक, 2010
सत्रावधि में सदन द्वारा निम्नलिखित संकल्प पारित हुए
1    ‘‘यह सदन भारत सरकार से अनुरोध करता है कि उत्तराखण्ड राज्य में भारी वर्षा बाढ़, प्राकृतिक आपदा को देखते हुए प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा घोषित की जाय‘‘।
2        ‘‘यह सदन परमपिता परमेश्वर से यह प्रार्थना करता है कि समस्त असमय काल कलवित व्यक्तियों की आत्माओं को शान्ति प्रदान करे तथा परिजनों को इस गम्भीर कष्ट को सहने के लिए शक्ति प्रदान करें। उक्त के अतिरिक्त यह सदन भीषण दैवीय आपदा के कारण गम्भीर और साधारण रूप से घायल व्यक्तियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है।‘‘
3    ‘‘ भारत का संविधान के अनुच्छेद-347 के अधीन उत्तराखण्ड राज्य में बोली जाने वाली गढ़वाली, कुमाँऊनी तथा जौनसारी बोलियों को उक्त क्षेत्र के निम्न प्रयोजनों के लिए महामहिम राष्ट्रपति द्वारा शासकीय मान्यता प्रदान कर दी जाये-
1.    ग्राम पंचायत की बैठकों में बोलने के लिएय
2.    क्षेत्र पंचायत की बैठकों में बोलने के लिए य
3.    जिला पंचायत की बैठकों में बोलने के लिए य
4.    अधिकारियों के क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान आम जनता द्वारा उनसे अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए य
5.    आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्य करने के लिए य
6.    सरकारी अस्पतालों में उपचार के समय चिकित्सक/कर्मचारियों को अपनी व्यथा बताने के लिए य
7.    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन सस्ता गल्ला उपलब्ध कराये जाने के लिए य
8.    सर्व शिक्षा अभियान के लिए य
9.    राज्य परिवाहन निगम की बसों में चालक/परिचालक वार्ता करने के लिए य
10.    मण्डी परिषद में गल्ले तथा अन्य खाद्य सामग्री के क्रय-विक्रय के लिएय
11.    राजकीय कार्यालयों और अधीनस्थ न्यायलयों में मौखिक रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत करनेे के लिए।‘‘
    विधान सभा की कार्यवाही के प्रसारण के सन्दर्भ में दिनांक 23 सितम्बर, 2010 को माननीय अध्यक्ष ने सदन को सूचित किया कि प्रश्नकाल की कार्यवाही के प्रसारण की सी0डी0 तैयार करके प्रतिदिन 04ः00 बजे अपराह्न तक सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, देहरादून को इस आशय से उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था की गई है कि वे प्रतिदिन की सी0डी0 इलैक्ट्रानिक मीडिया को प्रसारण हेतु उपलब्ध करवायें।   
    23 सितम्बर, 2010 के उपवेशन की समाप्ति पर मा0 अध्यक्ष द्वारा सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया। 12 अक्टूबर, 2010 को महामहिम राज्यपाल द्वारा सत्रावसान की घोषणा कर दी गई।